आदि बद्री

आदिबद्री, जो कि हेलिसेरा के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में भी जाना जाता है, सुंदर परिवेश में स्थापित है और लोहबा  से आदिबद्री तक की सड़क सुंदर इलाके से गुजरती है आदिबद्री के ठीक ऊपर एक छोटी झील बेनिताल स्तिथ है आदिबद्री  में सोलह मंदिरों के अवशेष हैं जो द्वाराहाट  (जिला अल्मोड़ा) के समान हैं यहाँ बद्रीनारायण को समर्पित एक मंदिर को पूजा के लिए अभी भी प्रयोग किया जाता है स्थानीय लोगों का एक अंधविश्वास है कि कुछ वर्षों पश्चात जोशीमठ से बद्रीनाथ की सड़क मंदिर के पास पहाड़ी मिलने से बंद हो जाएँगी और तब यह मंदिर तीर्थ यात्रा का स्थान बन जाएगा।यहाँ सोलह छोटे मंदिर बचे हुए हैं, जिनमें से सात पुराने गुप्ता काल के समतल  छतों के साथ अधिक प्राचीन हैं स्थानीय परंपरा के अनुसार मदिर का निर्माण कार्य संक्रचार्य ने किया जो आठवी शताब्दी के सुधारक तथा दार्सनिक थे सभी मंदिरों को एक छोटी सी जगह (12.5 मीटर X 25 mts।) में बनाया गया है तथा इनकी ऊंचाई 2 से 6 मीटर तक भिन्न हैनारायण का मुख्य मंदिर सामने में एक उंचा मंच द्वारा प्रतिष्ठित है, तथा छत पिरामिड रूप के छोटे घेरे के रूप में है जहां मूर्ति निहित है विष्णु की मूर्ति काले पत्थर से बनी हुई  एक मीटर ऊंची है । विष्णु निश्चित रूप से, बिद्रीनाथ का एक और नाम है इसलिए इस मंदिर को आदिबद्री भी कहा जाता है।यह पांच बद्रि (पंच बद्री) में से एक है, विशाल बद्री, योग-ध्यान बद्री, वृद्ध बद्री और भविष्य बद्री। सभी पांच तीर्थस्थल यहाँ से  निकटता में ही  स्थित हैं।

कैसे पहुंचें:

बाय एयर

निकटतम हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है, जो आदिबद्री से लगभग 210 किमी दूर है। देहरादून हवाई अड्डे से आदिबद्री तक टैक्सी तथा बस सेवाएँ उपलब्ध हैं।

ट्रेन द्वारा

ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून सभी के पास रेलवे स्टेशन हैं। आदिबद्री से निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (लगभग 192 किमी) है। ऋषिकेश से आदिबद्री बस/टैक्सी से पहुंचा जा सकता है।

सड़क के द्वारा

कर्णप्रयाग से 19 कि०मी० दूर आदिबद्री पहुंचा जा सकता है जो वापसी में रानीखेत, नैनीताल और रामनगर के साथ एक मोटर रोड से जुड़ा हुआ है।