संस्कृति और विरासत


चमोली में घर
घर

जिले के घरों को किसी भी नगर नियोजन योजना के अनुसार नहीं बनाया गया है, लेकिन जहां पानी का झरना सुलभ है या नदी के किनारे पर वहां जमीन के आधार पर समूहों में संयोग से किया गया है । घरों का निर्माण पत्थरों से होता है और आम तौर पर दो-मंजिला होते है, कुछ तीन से पांच मंजिला भी होते हैं, भू-तल पर बहुत कम ऊंचाई वाले कमरे होते है , जो आमतौर पर 1.8 मी0 तक होते हैं। ज्यदातर मवेशीयों के आवास के लिए इस्तेमाल किया जाते रहे है प्रत्येक घर के सामने आंगन होता है जिसे चौक कहते हैं । मिट्टी और पत्थर से बनी सीढ़ीयां या लकड़ी से निर्मित सीढ़ीयां ऊपरी मंजिला की ओर जाती है, छत लकड़ी की होती है ऊपरी मंजिला की ऊंचाई आम तौर पर 2.1 मीटर तक होती है और छत आमतौर पर पठालों (क्वार्टजाइट स्लैब) के साथ लम्बी लकड़ी के ढलान वाले ढांचे की होती हैं, अच्छी तरह से नालीदार जस्ती लोहे की चादरें का उपयोग करते हैं। आम तौर पर ऊपरी कमरे के सामने ऊपरी मंजिला में एक बरामदा होता है

दो से तीन मंजिला वाले मकानों में बाल्कनियों के साथ सामने एक आंगन होता है जहां लोग अपने खारे, बुनाई, कताई और घर के अन्य काम करते है। कुछ घर पांच या छह मंजिला भी होते हैं, सबसे ऊपरी मंजली रसोईघर के रूप में इस्तेमाल की जाती है